दुनियाभर के मौसम विज्ञानियों ने साल 2026 को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और विभिन्न वैश्विक जलवायु मॉडल्स के अनुसार, प्रशांत महासागर में 'सुपर अल नीनो' की स्थितियां तेजी से बन रही हैं। इसका सीधा और विनाशकारी असर भारत के मानसून और गर्मी के रिकॉर्ड्स पर पड़ने की आशंका है।
गर्मी के टूटेंगे सारे रिकॉर्ड
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 अब तक का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है। अल नीनो के कारण समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है, जिससे धरती के वायुमंडल में गर्मी का 'कॉकटेल' तैयार हो रहा है।
भीषण लू (Heatwaves): भारत के उत्तर और मध्य भागों में मार्च-अप्रैल से ही तापमान 45°C से 48°C के पार जाने के आसार हैं।
ग्लोबल वार्मिंग का तड़का: पहले से ही बढ़ते वैश्विक तापमान में अल नीनो का जुड़ना 'आग में घी' का काम करेगा।
भारतीय मानसून: सूखे का बड़ा खतरा
भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाने वाला दक्षिण-पश्चिमी मानसून इस बार गंभीर खतरे में है।
कम बारिश की आशंका: अल नीनो आमतौर पर मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से 10% से 15% कम रह सकती है।
मानसून में देरी: विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के केरल पहुंचने और फिर उत्तर भारत की ओर बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी रह सकती है।
खेती पर असर: धान, दलहन और तिलहन की फसलों पर सूखे की मार पड़ सकती है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ने का डर है।
क्या होता है अल नीनो (El Niño)?
वैज्ञानिक भाषा में समझें तो यह प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के गर्म होने की घटना है।
जब समुद्र का पानी गर्म होता है, तो हवा का दबाव बदल जाता है।
इसके परिणामस्वरूप, जो मानसूनी हवाएं नमी लेकर भारत आती हैं, वे कमजोर पड़ जाती हैं या अपना रास्ता बदल लेती हैं।
इसका गणित सीधा है: प्रशांत महासागर में गर्मी = भारत में कम बारिश और अधिक लू।
विशेषज्ञों की राय
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यद्यपि 'इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) जैसी अन्य स्थितियां मानसून को थोड़ा सहारा दे सकती हैं, लेकिन अल नीनो का प्रभाव इतना प्रबल है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को अभी से जल संरक्षण और सूखे से निपटने की रणनीतियां तैयार करने की सलाह दी गई है।
सावधानी ही बचाव है: इस साल पानी की बर्बादी रोकें और भीषण गर्मी से बचने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दें। आने वाले महीने कठिन हो सकते हैं।



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