घर के अंदर मौजूद वायु प्रदूषण से हर साल 13 लाख लोग मर जाते हैं, ऐसे बचें - ब्रह्मा अनुभूति

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मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

घर के अंदर मौजूद वायु प्रदूषण से हर साल 13 लाख लोग मर जाते हैं, ऐसे बचें

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घर के अंदर की हवा ले रही है जान
घर के अंदर की हवा ले रही है जान

घर के अंदर मौजूद वायु प्रदूषण से हर साल 13 लाख लोग मर जाते हैं, ऐसे बचें

आपके चारों तरफ मौजूद आबोहवा इतनी प्रदूषित है कि वह लोगों की जान ले रही है। घर के बाहर के वायु प्रदूषण पर तो हमारा ध्यान होता है। लेकिन हम घर के अंदर मौजूद वायु प्रदूषण से अनजान हैं, जो दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है। घर के अंदर के वायु प्रदूषण से भारत में हर साल करीब 13 लाख लोगों की जान चली जाती है।

घर के अंदर की हवा एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है, और भारत जैसे देश में, जहां घर के अंदर खाना पकाने से लेकर हानिकारक रसायनों और अन्य सामग्रियों के कारण मकान के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है और यह बाहरी वायु प्रदूषण की तुलना में 10 गुना अधिक नुकसान कर सकती है।

विशेषज्ञों की मानें तो हवादार घर नहीं होने और साफ हवा के अंदर नहीं आने की वजह से फेफड़ों के कामकाज में कठिनाई सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। स्थिति इससिलए ज्यादा खराब हो रही है क्योंकि भारत में घर के अंदर हवा की गुणवत्ता पर कोई ठोस नीति नहीं है। जिस कारण इसके वास्तविक प्रभाव को जान पाना बहुत मुश्किल है।

घर के अंदर प्रदूषण के कुछ दुष्प्रभावों में आंखों, नाक और गले में जलन, सिरदर्द, चक्कर आना, थकान शामिल हैं। इसके अलावा यह लंबे समय में दिल की बीमारी और कैंसर का कारण बन सकता है।

50 फीसदी लोग प्रदूषित वातावरण में करते हैं काम

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल की मानें तो लोग अपने जीवन का 90 फीसदी से ज्यादा समय घरों में बिताते हैं। 50 फीसदी से ज्यादा कामकाजी वयस्क दफ्तरों या गैर-औद्योगिक वातावरण में काम करते हैं। यह बड़े पैमाने पर प्रदूषण के कारण इमारत से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है।

कुछ अन्य कारकों में विषैले रासायनों, जैसे सफाई उत्पादों, अस्थिर कार्बनिक यौगिकों, धूल, एलर्जेंस, संक्रामक एजेंट, सुगंध और तंबाकू का धुआं शामिल हैं। भारत में घर के अंदर वायु की गुणवत्ता के लिए कोई औपचारिक मानक नहीं है। ऐसे में इनडोर एअर पॉल्यूशन से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का अनुभव वर्षों बाद ही किया जा सकता है।
घर के अंदर के प्रदूषण के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि आदर्श समाधान तो यही है कि सभी खिड़कियों को खोला जाए और इनडोर प्रदूषकों से बचने की सलाह दी जाए। हालांकि, प्रदूषित शहरों में यह मुश्किल है, क्योंकि बाहरी प्रदूषक घर में घुस सकते हैं।

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